॥ सह-अस्तित्व ॥

मध्यस्थ दर्शन

अनुभव-मूलक सह-अस्तित्ववादी जीवन दृष्टि

जाने हुए को मानना, माने हुए को जानना ही मानव की आवश्यकता है।

मानवीय आचरण सूत्र (1.57)

जागृत जीवन ही द्रष्टा, कर्ता और भोक्ता है।

मानवीय आचरण सूत्र (3.24)

मानव भ्रमवश पीड़ित व जागृतिपूर्वक सुखी होता है।

मानवीय आचरण सूत्र (3.29)

सह-अस्तित्व ही परम सत्य है।

मानवीय आचरण सूत्र (5.2)

सर्वशुभ में स्व-शुभ समाया हुआ है।

मानवीय आचरण सूत्र (6.33)

संबंधों व मूल्यों की पहचान तथा निर्वाह क्रिया ही न्याय है।

परिभाषा संहिता

समृद्धि का अर्थ है आवश्यकता से अधिक उत्पादन व अभाव का अभाव।

परिभाषा संहिता

न्याय पूर्वक जीने में दृढ़ता व निष्ठा ही धीरता है।

परिभाषा संहिता

स्वयं की अक्षमता का प्रदर्शन ही क्रोध है।

परिभाषा संहिता

मानव-मानव परस्परता में मूल्य-निर्वाह = व्यवहार।

परिभाषा संहिता

मध्यस्थ दर्शन के बारे में

मध्यस्थ दर्शन अस्तित्व की सच्चाईयों को समझने का एक सुगम रास्ता है। यह मनुष्य को स्वयं को समझने का एक अवसर प्रदान करता है तथा परिवार, समाज, राष्ट्र और पूरी धरती पर मानव और शेष प्रकृति के साथ पूरक होकर जीने का एक मार्ग दिखाता है।

"अस्तित्व सह-अस्तित्व के रूप में नित्य वर्तमान है।"

इस यात्रा में हम स्वयं, परिवार, समाज एवं प्रकृति को एक व्यापक तथा पूरकता पूर्वक एक-दूसरे से जुड़ी हुई दृष्टि से समझने का प्रयास करते हैं।

शिविर में क्या होता है

एक सहज, अनुभवमूलक यात्रा।

सहज वातावरण

शांत, प्राकृतिक परिवेश में सरल जीवन एवं संवाद।

अनुभवमूलक अध्ययन

रटना नहीं — स्वयं के अनुभव से समझ का विकास।

खुला संवाद

जीवन के हर प्रश्न पर निःसंकोच चर्चा एवं समाधान।

समाधान की दिशा

स्वयं से परिवार और समाज तक — व्यावहारिक जीवन दृष्टि।

आगामी तिथियाँ

पूरा कैलेंडर →
  • 18–20सित

    युवा कार्यशाला, राजकोट

    18–20 सितम्बर · राजकोट

    📅
  • 2–11अक्टू

    मानव व्यवहार दर्शन, कानपुर

    2–11 अक्टूबर · कानपुर

    📅
  • 14–18अक्टू

    युवा कार्यशाला, हैदराबाद

    14–18 अक्टूबर · हैदराबाद

    📅

वीडियो

मध्यस्थ दर्शन में मानव मूल्य — व्याख्यान १ (AKTU)

पूज्य ए. नागराज जी की जीवनकथा — डॉ. श्याम कुमार

जीवन विद्या परिचय — परिचय शिविर, दिल्ली

युवा शिविर — दिवस १ सत्र १

परिवार, परवरिश व प्यार पर गहरी चर्चा — जयपुर

परिचय शिविर, दिल्ली (पूरी शृंखला)

प्रणेता

दृष्टि के स्रोत

मध्यस्थ दर्शन सह-अस्तित्ववाद एक सहज जीवन दृष्टि है, जो मनुष्य को पूरी सृष्टि को सटीकता से समझने में मदद करती है। इस समझ के फल-परिणाम में मानव स्वयं में विश्वास, सम्मान, स्नेह.. प्रेम जैसे भावों से भरा रहता है तथा विचार एक-दूसरे के लिए पूरक होने के अर्थ में, हर समस्या को समाधान की दृष्टि से देखने में क्रियाशील रहता है। परस्परता में जीते समय दूसरे मनुष्यों के साथ न्याय पूर्वक जी पाता है और शेष प्रकृति (हवा, पानी, धातु, पेड़-पौधे, पशु-पक्षी) के साथ प्राकृतिक नियमों का ध्यान रखते हुए उत्पादन करता है व उपलब्ध सुविधाओं का सदुपयोग करता है।

और जानें

इस यात्रा में सहभागी बनें

जीवन को अस्तित्व की सही समझ, सम्बन्ध में प्रेम का भाव एवं विचार में समाधान की दृष्टि से जीने का अभ्यास — आपके अपने परिवार व कार्य-स्थली से आरम्भ…

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